कॉलेस्ट्राल (cholesterol) का बढ़ना क्या है ? कॉलेस्ट्राल के लक्षण एवं रामबाण औषधीय घरेलु उपचार (Ayurveda Treatment )

कॉलेस्ट्राल (cholesterol) एक वसा जैसा घटक है, जो रक्त में परिसंचरण करता रहता है, सामान्य अवस्था में यह हमारे सरीर के लिए हानिप्रद भी नहीं है. सैल-मैम्ब्रन की समुचित देखरेख  के लिए ही हमारे सरीर में इसकी नितांत आवश्यकता होती है. चिकित्सा-विज्ञान के अनुसार हमारा सरीरी कुदरती ढंग से दो प्रकार के कॉलेस्ट्राल निर्मित करता है- प्रथम कॉलेस्ट्राल एलο डीο एलο है (L.D.L), जिसे बुरा कॉलेस्ट्राल भी कह दिया जाता है, क्यूंकि यह अत्यधिक मात्र में बड़ने पर धमनियों को अवरुद्ध करते हुए ह्र्दयघात की संभावनाओ को बढ़ता है, कॉलेस्ट्राल के अच्छे प्रकार को एचο डीο एलο (H.D.L) कहा जाता है. (What is cholesterol)
कॉलेस्ट्राल की सामान्य मात्रा प्रति 100 मिलीलीटर सीरम में 150 से 250 मिलीग्राम तक सामान्य कॉलेस्ट्राल (cholesterol) माना गया है.
अन्य नोर्मल वल्युज इस प्रकार है.–
एलο डीο एलο है (L.D.L)– 190 मिलीग्राम प्रतिशत से कम होनी चाहिए. आधुनिक विज्ञानं में 190 इसकी लिमिट कही गयी है, इस से ज्यादा हो तो फिर रोगी को l.d.l. को कम करने की दवा दी जाती है.
एचο डीο एलο (H.D.L)– 40 से 70 मिलीग्राम प्रतिशत या इस से ज्यादा होनी चाहिए.
कॉलेस्ट्राल बदने के प्रमुख कारण —
जैनेटिक फैक्टर अर्थात अनुवांशिक कारण
संतृप्त-वसा का अत्यधिक सेवन करना
शारारिक भार का अधिक बढना
धुम्रपान
परिश्रम का अभाव
लक्षण —
यद्यपि कॉलेस्ट्राल (cholesterol) बढ़ने में कोई सुस्पष्ट लक्षण नहीं होते है, लेकिन इसके कारण अन्य बिमारियों के लक्षण पैदा होने लगते है, जैसे एंजाइना
स्तर बहुत बढ़ा हुआ होने पर कुहनी और घुटनों पर तथा आँखों के निचे यलो-नोड्युल्स उभरने लगते है. लेकिन बहुत अधिक कॉलेस्ट्राल की मात्र के हमारे सरीर के लिए अस्वास्थ्यकर हो सकती है,
कॉलेस्ट्राल का घरेलु उपचार–
सुबह शाम खाली पेट लोकी का रस पियें, साथ में आंवले का रस भी सेवन करें, गौमूत्र का अर्क 30 ml. बराबर मात्रा में शहद मिलाकर आधा कटोरी गुनगुने पानी के साथ घोलकर पियें. अमृत के समान लाभप्रद है. कद्दू का नियमित सेवन भी लाभ देता है इस से कॉलेस्ट्राल एवं ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रहता है
क्या सेवन करने से बचे–
मक्खन, दूध से बनी हुई मिठाइयाँ एवं अन्यान्य खाद्य-पधार्थ, वनस्पति घी, पाम ऑइल, तले हुए पधार्थ, सफ़ेद चीनी, पॉलिश किया हुआ चावल, मांस, मदिरा-पान, धुम्रपान, अंडे, विविध फ़ास्ट फ़ूड, तम्बाकू का किसी भी रूप में सेवन करना, विविध शीतल पेय.
क्या सेवन करें–
विटामिन-C तथा विटामिन-E का नियमित सेवन करें.  विटामिन-C तथा विटामिन-E की कार्मुकता अर्थात प्रभाव को बढ़ा देता है, साथ ही यह सरीर के लिए लाभप्रद एचο डीο एलο (H.D.L) को भी बढ़ता है,
लौकी (घिया) आयुर्वेद के अनुसार मीठी लौकी का फल हर्दय के लिए असीम हितकारी होता है, इसके सेवन करने से हमारे सरीर में पित एवं कफ नमक दोष शांत होने लगते है खाने में यह स्वादिष्ट एवं वीर्य को भी बढ़ता है. शरीर की समस्त की समस्त धातुओ को पुष्टि प्रदन करता है. लौकी में आयोडीन, फासफोरस पाए जातें हैं, विटामिन-B & C भी इसमें प्रमुख मात्र में पायें जाते है.
आंवला कॉलेस्ट्राल के बढे हुए स्तरों को प्रभावशाली ढंग से नियंत्रित कर देता है, आंवले में पाए जाने वाले पैक्टिन रेशे धमनियों में जमे हुए कॉलेस्ट्राल को बाहर निकालते हुए, धमनियों की कठोरता को दूर करते है, वासा के जमाव को भी रोकते है. इन के सेवन से उच्च रक्तचाप भी नियंत्रित होता है, आंवले पे पाए जाए वाले रेशे हमारे शरीर में ओक्सिदेसन की प्रक्रिया को रोकते है, बैक्टीरिया एवं वायरस का प्रतिशोध करते हुए हमारे शरीर के प्रतिरोध तंत्र को भी शक्ति प्रदान करता है.
लहसुन और दिल का रिश्ता तो चोली और दमन जैसा है, धमनी-काठिन्य अर्थात आर्थरोस्क्लेरोसिस, हार्ट एन्लाग्मेंट, हार्ट फैल्योर, हाईपर-टेंसन इत्यादी विक्रतियो की यह रामबाण औषधि है. ईन सब पर एकपोथिया लहसुन आम लहसुन की अपेक्षा अधिक प्रभावी है. उल्लेखनीय है की लहसुन का सेवन किसी भी रूप में करने से रक्तगत कॉलेस्ट्राल का स्तर तेजी से गिरता है, परिणाम स्वरुप धमनी काठिन्य की सम्भावनाये काफी कम हो जाती है. लहसुन ब्लड प्रेसर को नियंत्रित करता है, इस के सेवन से ट्यूमर बनने की प्रक्रिया रूकती है.
आयुर्वेदिक औषधि गूगल भी बेहद लाभप्रद है. ध्यान रखे की किसी भी रूप में गूगल सेवन करने के आधा घंटे पहले और आधे घंटे बाद तक कुछ भी नहीं खाएं.
कॉलेस्ट्राल को नियंत्रित करने के लिए अदरक भी बेमिसाल है. यह पोस्टाग्लेडिन तथा थ्रोम्बोक्सेन की उत्पत्ति पर प्रभावी ढंग से रोक लगती है, उल्लेखनीय है की जब हमारा शरीर अनियंत्रित रूप से पोस्टाग्लेडिन तथा थ्रोम्बोक्सेन का निर्माण करता है तो रक्त का थक्का बनने की क्षमता बढ़ जाती है.
इसबघोल के नियमित सेवन से भी कॉलेस्ट्राल नियंत्रित होता है. 5 से 10  ग्राम की मात्रा में इस की भूसी अर्थात हस्क का सेवन करें. तत्पश्चात पर्याप्त मात्रा में पानी पियें , ऊपर से अंगुरासव पिएं. नवीनतम अनुसंसाधन बताते है की इसबघोल विश्वशनीय ढंग से रक्तगत कॉलेस्ट्राल को नियंत्रित करती है, विशेष रूप से एलο डीο एलο है (L.D.L) को जो विविध हर्दय रोगों का जनक मन जाता है.  इसबघोल पाचन-संस्थान में कॉलेस्ट्राल बहुत बाइल अर्थात पित्त का काफी हद तक सोखने को क्षमता रखती है, परिणाम स्वरुप रक्तगत कॉलेस्ट्राल भी नियंत्रित हो जाता है.
हल्दी पर किये गएँ अध्यन बताते है की इसे लोग जिनको आहार में प्रतिदिन एक ग्राम हल्दी का समावेश किया जाता है, उनका ट्राइग्लिसराइड एवं टोटल कॉलेस्ट्राल लेवल तीन से छे महीने में ही कम हो जाता है, हल्दी  “कॉलेस्ट्राल” को कम करने वाली दवाओ से किसी भी रूप में  कम नहीं है, हल्दी का सेवन करने से रक्त वाहिकाओ में वासा का जमाव नहीं होता है, फलस्वरूप हर्दय रोगों के पैदा होने की संभावनाएं बहुत ही कम हो  जाती है.
धनिया और जीरा को हजारो वर्षो से भारतीय रसोई में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है. उल्लेखनीय है की ये दोनों ही बेहतरीन एंटी-ओक्सीडेंट है, इनके नियमित सेवन करने से खून के ब्लोकेज अर्थात अवरोध आसानी से दूर हो जातें है, परिणाम स्वरुप व्यक्ति बाई-पास सर्जरी से बच जाता है.
विधि– 250 ग्राम धनिया दाना तथा 250 ग्राम जीरे को लेकर बारीक कपड-छान चूरण तैयार करें. 3 से 6 ग्राम की मात्र में यह चूरण सवेरे खालिपेट निराहार अवस्था में पानी के साथ सेवन करें. इसी प्रकार शाम को भी सेवन करें, इसके आगे पीछे एक घंटे तक कुछ भी सेवन न करें. अनेक बार अजमाया हुआ अचूक नुस्खा है.
अनार के रस का नियमित उपयोग भी लाभप्रद है. मेथी दाना, अंगूर, प्याज, किशमिश, त्रिफला, अर्थात हरड, बहेड़ा, आंवला, छाछ, भुने हुए काले चने, तुलसी की पतीयाँ भी इस विकार में ईस विकार में अमृत के समान लाभ देते है. भुने हुए चने रक्तचाप को नियंत्रित करने में बेजोड़ है. आयुर्वेद विशेषज्ञों की यह प्रबल मान्यता है की उच्च रक्तचाप के पीडितो को बराबर मात्र में गेहूं और काला चना मिलकर  पिसावकर चोकर सहित आटे से बनी रोटी रोटी का नित्य सेवन करना चाहिए यह करने से आप को दवा की जरुरत ही नाही रहेगी.
एलोवेरा-एलोवेरा का प्रयोग भी परम्परागत रूप से कॉलेस्ट्राल नियंत्रण हेतु सफलता पूर्वक किआ जाता रहा है. एलोवेरा के रस से नियमित सेवन से रक्तचाप अर्थात ब्लडप्रेशर नियंत्रित होता है, रक्त की शुधी हो कर रक्त प्रवाह बेहतर ढंग से होने लगता है. विशेष बात यह है की एचο डीο एलο (H.D.L) कॉलेस्ट्राल को बढाता है तथा ट्राइग्लिसराइड को कम करता है. इस के सेवन से हर्दय की दुर्बलता दूर होती है. इस में पाई जानेवाली गरमी तथा तीखेपन के कारण हर्दय धमनियों के अवरोध दूर होने लगते है, इसे हर्दय की सुजन भी कहते है.
अनार-प्रतिदिन एक गिलास अनार का रस पिने से जादुई ढंग से कॉलेस्ट्राल नियंत्रित होने लगता है.

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